Monday, October 17, 2011

दिग्विजय सिंह को खुल्ला पत्र ! An Open Letter To Digvijay Singh !

કોંગ્રેસ, મેડમ, રાજકુમાર અને દિગ્ગીનું નવું સૂત્ર: 
પત્રાચાર ચલાવો , ભ્રષ્ટાચાર બચાવો !




અન્નાની શક્તિઓ હણી લેવા, એમને અને સાથીદારોને બદનામ કરવા સરકારે રીતસર ઝુંબેશ શરુ કરી છે. આવી સ્થિતિમાં કોઈપણ છટકામાં ભોળવાયા વગર આપણે આપણો ટેકો આ આંદોલન ને અને તેના સૂત્રધારોને આપ્યા રાખીએ એમાં જ આપણું કલ્યાણ છે. આપણે એક પ્રજા તરીકે બેશક કમજોર છીએ. પરંતુ મામલે કોઈ તકસાધુ, ભ્રષ્ટ રાજકારણી આપણને ડ્રાઈવ કરી પોતાની મેલી મુરાદ પાર પાડી જાય તો આપણે ડૂબી મરવું જોઈએ. દિગ્વિજયે અન્નાને પત્ર લખ્યો હોય તો આખો દિવસ તેનું કવરેજ આવશે પરંતુ અન્નાના જવાબને ઝલક માત્ર દ્વારા નિપટાવી દેવાશે. મીડિયાને આ વખતે બરાબર મેનેજ કરેલું છે કૌરવોએ. જન લોકપાલથી ધ્યાન હટાવી, અન્ના અને તેમના સાથીદારોને રોજ નીતનવા - માથામેળ વગરના વિવાદોમાં ઘસડ્યે રાખવા - એ કામની જ જાણે દિગ્વિજયને સુપારી અપાઈ છે. અન્નાએ ભલે મૌન ધારણ કર્યું, આપણે આ કુપ્રચારનો જડબાતોડ જવાબ આપવો જ રહ્યો. કારણ કે, જન લોકપાલની લડત નિષ્ફળ જશે તો તેનું સૌથી વધુ નુકસાન આપણને જ છે. એટલે જ આ ખુલ્લો પત્ર અહીં હિન્દીમાં લખી રહ્યો છું. કારણ કે, તેનો વધુ ને વધુ ફેલાવો જરૂરી છે. મિત્રો, સામાન્ય રીતે હું જ મારા કોઈ લેખ વગેરેને વધુ ને વધુ સ્પ્રેડ કરવાનું કહું એ સારું ના કહેવાય. પરંતુ આ બાબત જનહિતને સ્પર્શતી છે. આપ સૌને વિનંતી કે, આ પત્રનો મહત્તમ ફેલાવો કરો! ફેસબુકથી લઇ ટ્વીટર અને ગુગલ પ્લસથી માંડી ને ફેન પેઈજ, સ્ટેટસ, વિવિધ બ્લોગ્સ... જ્યાં શક્ય હોય ત્યાં તેને પ્રસરાવી દો...
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आदरणीय दिग्विजय जी ,

नमस्कार! 

अन्नाजी को आपने जो तीन - तीन पत्र लिखे है उस से प्रेरित होकर यह पत्र आप को लिख रहा हूँ.

कुछ मुद्दे है - जो इस देश के आम आदमी होने के नाते मेरे दिमाग में सुई बनकर चुभ रहे है, कुछ सवाल है - जो आज तक निरुत्तर है.

आप ने अन्नाजी को कहा की वोह गलत लोगो से घिरे हुए है और अन्नाजी को उन का साथ छोड़ देना चाहिए. अन्नाजी के बारे में आप को चिंता है यह जानकार ताज्जुब भी हुआ और अच्छा भी लगा. पर क्या आपने कभी यह सोचा है की, कोंग्रेस आजकल कैसे लोगो से घिरी है? राजा जेल में है, कलमाड़ी भी उन को कंपनी दे रहे है, कई और नाम में ले सकता हूँ. पर आप अभी भी डी.एम्.के. से घिरे हुए है. करूणानिधि की सरकार में हाजरी यह बात प्रस्थापित करती है की आपकी कथनी और करनी में बहुत लम्बा अंतर है. शायद, लाखो प्रकाशवर्षो का अंतर. इस विषय पर और गहनता से बात करते है: आप के प्रधान मंत्री कैसे-कैसे लोगो से घिरे है, कभी सोचा है आपने? एक कपिल सिब्बल है - जिन के पास टु-जी में फंसी कंपनियों पर एक्शन लेने की सत्ता थी, उन्होंने नहीं लिए. चिदंबरम है - जो खुद इस महा घोटाले के एक सूत्रधार है. मनीष तिवारी जैसे लोग है - जो आपकी बडबोलेपन की विरासत संभालने की क्षमता रखते है. और आपकी अधिष्ठात्री सोनियाजी है - जो खुद इतने बड़े मामले पर कुछ भी कहेना नहीं चाहती. उनकी खामोशी बहुत कुछ बयाँ कर रही है. यह बिलकुल जाहिर है की, भ्रष्टाचार के विरुध्ध आन्दोलन  अगर सफल होता है तो सबसे ज्यादा नुकसान सोनियाजी और उनके सुपुत्र तथा इस देश के राष्ट्रीय दामाद रॉबर्ट वढेरा को होने वाला है. और अब यह भी सोचिये की, सोनियाजी और देश के एकमात्र राजकुमार कैसे-कैसे निम्नत्तम लोगो से घिरे है. आप उनके सबसे वफादार और विश्वसनीय साथी है. क्या यह वास्तविकता स्वयं इस बात का प्रमाण नहीं है की, सोनियाजी और राहुल की इस देश की सुरक्षा के प्रति और एकात्मता के प्रति तथा देशहित के प्रति जो प्रतिबध्धता है वो बिलकुल शून्य है! कोई स्वस्थ दिमाग वाला आदमी और विकास के रास्ते पर चल रही पार्टी आप जैसे विकास विरोधी, देश विरोधी और बदजुबान व्यक्ति को कैसे बर्दाश्त कर सकते है? आप का उनके नजदीक होना और बिना रोकटोक अनापशनाप बोलना यह दरअसल सोनियाजी की गन्दी सोच को उजागर करता है. जब हम इस बात पर विचार करते है कौन कैसे लोगो से घिरा है, तो मेरे दिमाग में यह बात भी आती है की, कोंग्रेस आजकल कैसे लोगो से घिरी है? क्या यह भी एक राष्ट्रीय शर्म की बात नहि है की, मनमोहन जैसे दोगुले और ढोंगी नेता इस पार्टी के शीर्ष पर बैठे है और इस देश का नेतृत्व कर रहे है? बिलकुल है. और इसी कड़ी में मुझे यह भी विचार आता है की, देश की जनता कैसे -कैसे निम्न स्तरीय नेताओ से और अवाम विरोधी सरकार से घिरी है. जब आप को और चिदम्बरम, सोनिया, मनमोहन जैसे नेता को देखते है, हम आम लोगो का प्रजातंत्र से भरोसा उठ जाता है.

"जब आपको देखता हूँ, मुझे ओसामाजी का
स्मरण होता है. पर किरण बेदी को देखता
हूँ तो मुझे वोह वर्दी में उन्नत खड़ी एक
अफसर दिखाई देती है!
आपकी मेडम को देखता हूँ तो उन की बेशर्म
खामोशी मुझे नज़र आती है,
अन्ना को देखते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी
एक बुलंद आवाज़ मुझे सुनाई देती है.
जब मनमोहन को देखता हूँ, विचार आता है की,
जो आदमी हर समस्या के लिए जादू की छड़ी खोजता है,
हमारे लिए बहेतर होगा की हम
उन की जगह पी.सी. सरकार या के.लाल को प्रधान मंत्री बनाए.
जब में जस्टिस हेगड़े की और देखता हूँ,
मुझे वोह मनमोहन की तुलना में
बिलकुल निष्कलंक, बेदाग़ और स्वाभिमानी,
स्वस्थ और इमानदार लगते है "


जब आप अन्ना के साथियो के बारे में कुछ बोलते है, हमारी नज़र के सामने से एकदम धड़ल्ले से कुछ तस्वीरे पसार होने लगती है. मानो कोई फिल्म का फास्ट फॉरवर्ड चल रहा हो. जिस में आप, मेडम सोनियाजी, राहुल, चिदम्बरम, सिब्बल, मनमोहन जैसे लोग दिखते है और साथ-साथ अरविन्द केजरीवाल, प्रशांत भूषण, किरण बेदी, जस्टिस हेगड़े जैसे लोग भी दिखते है. और हम जट से बोल देते है की, आप सब लोग से तो यह अन्ना एंड पार्टी करोडो गुना बहेतर है. जब आपको देखता हूँ, मुझे ओसामाजी का स्मरण होता है. पर किरण बेदी को देखता हूँ तो मुझे वोह वर्दी में उन्नत खड़ी एक अफसर दिखाई देती है! आपकी मेडम को देखता हूँ तो उन की बेशर्म खामोशी मुझे नज़र आती है, अन्ना को देखते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी एक बुलंद आवाज़ मुझे सुनाई देती है. जब मनमोहन को देखता हूँ, विचार आता है की, जो आदमी हर समस्या के लिए जादू की छड़ी खोजता है, हमारे लिए बहेतर होगा की हम उन की जगह पी.सी. सरकार या के.लाल को प्रधान मंत्री बनाए. जब में जस्टिस हेगड़े की और देखता हूँ, मुझे वोह मनमोहन की तुलना में बिलकुल निष्कलंक, बेदाग़ और स्वाभिमानी, स्वस्थ और इमानदार लगते है. मेरी बात नहीं है, इस देश का हर कोई स्वस्थ आम आदमी के येही विचार है. अन्ना मुझे इस लिए कभी देवदूत नज़र आते है, क्यूँ की वे जिस का वध करने निकले है वोह सभी दैत्य है. और हम दैत्यवृत्ति का अनुभव इन दिनों बहुत अच्छे तरीके से कर रहे है. जब आप यह कहेते है की, अन्ना कोंग्रेस का हीं विरोध क्यूँ कर रहे है - आप को यह भी सोचना चाहिए की जन लोकपाल का सबसे ज्यादा विरोध कौन कर रहा है. अगर कोंग्रेस चाहती है की, यह बिल पास हो तो यह बहुत आसानी से हो सकता है. पर आप ने चोर की दाढ़ी में तिनका वाली कहावत तो सुनी ही होंगी! 

Courtesy: bamulahija.com
आप की मंशा किसी से छिपी नहीं है. आप अपनी अधिष्ठात्री देवी के इशारों पे चल के अन्नाजी के आन्दोलन को बदनाम करने के प्रयास बिना छुपाये ही कर रहे है. अब छुपाना आप लोगो की फितरत नहीं, आप जुल्म भी करते है तो, केमेरा के सामने ही करते है. और रामलीला मैदान में हत्याकांड भी मिडिया को साक्षी रख के करते है. आप भ्रष्टाचार भी करते है तो अपने "इमानदार" अर्थशास्त्री प्रधान मंत्री को साक्षी रख के ही करते है. सब कुछ बिलकुल खुल्ला है. कोई आवरण नहीं रहा. आप की दिगंबर अवस्था भी अदभुत है. यह अनोखी यात्रा है कोंग्रेस की. और यह पड़ाव भी बहुत अवर्णनीय है! जहाँ लाज - शर्म सब छुट गया है. एक तम्बूरा ले के जैसे मीराबाई जोगन बन गलियों में घुमा करती थी, आज एक भोगन बन कोंग्रेस पार्टी हाथ में पांचसो-हजार की गड्डी लिए हुए देश में निर्भीक घूम रही है. जब आप ऐसा कोई पत्र लिखते है, कृपया अपनी स्थिति का पहेले अवलोकन कर लिया कीजिये. 

भ्रष्टाचार पर आप गंभीर है, आपकी पार्टी और प्रधान मंत्री भी गंभीर है , ऐसा आपने दावा किया. एक आम नागरिक होने के नाते मुझे भी लगता है की, आप सब इस विषय पर गंभीरता से सोच रहे है: आप विचार कर रहे है की, अब कैसे भ्रष्टाचार के नए रस्ते खोजे जाएँ , जिस से आप सब और भी मोटे हो और तगड़े हो. जब सूचना के अधिकार के जरिये  कई घोटाले सामने आये तो आप के "इमानदार" प्रधान मंत्री कहेते है, "सूचना के अधिकार का रिव्यू अब ज़रूरी है!" अगर कोई इमानदार प्रधान मंत्री होता तो कहेता : "अरे वाह! एक कानून अगर घोटाले का पर्दाफ़ाश करने में इतना उपयोगी सिध्ध हो रहा है तो क्यूँ न इसे और भी सख्त और प्रभावी बनाया जाए!" पर हम को पता है, मनमोहन की "इमानदारी" कौन सी बला का नाम है. यह ठीक वैसी ही है जैसी लादेन के करुणा और चार्ल्स शोभराज की नीतिमत्ता. भ्रष्टाचार पर आप सब लोग यह विचार कर रहे है की, कौन सा ऐसा तरीका हो जिस में आप भ्रष्टाचार तो दिल फाड़ के कर सके परन्तु किसी को उसकी भनक तक न लगे. इसी लिए जब आप कलमाड़ी और रजा वगैरह की जेल यात्रा का श्रेय कोंग्रेस को देते है तो बड़ा भद्दा लगता है सुनने में! आप ने इन सब महानुभावो को इसी तरह बचाने का प्रयत्न किया था जैसे आप आज चिदम्बरम को बचा रहे है. शुक्र हो, केग, सुप्रीम कोर्ट और टाइम्स नाऊ जैसे चेनलो का - की आज यह सब पापी जेल में है. आप जब अन्नाजी को लिखे पत्र में इस बात का श्रेय ले रहे थे - आपकी उंगलिया क्यूँ नहीं कट गई? क्यूँ जमीन नहीं फट गई?? और क्यूँ आप को किसी ने ऐसा पाप करने से रोका नहीं? 

इस देश का हर नागरिक आपको बहुत कुछ कहेना चाहता है, बदकिस्मती यह है की उन के पास माध्यम नहीं है. मै भी संघ का कोई बहुत बड़ा समर्थक नहीं हूँ. मुझे उन की कई बाते पसंद नहीं है. परन्तु आप जब अन्नाजी के ऊपर संघ के समर्थन का आरोप लगाते है, आश्चर्य होता है. मेरे नाजुक दिमाग में यह बात नहीं घुस रही की, यदि कोई संगठ्न भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन को अपना सहयोग देता है, समर्थन देता है तो इस में बुराई क्या है? मुझे तो मन में यह सवाल चुभ रहा हैं की आप की पार्टी इस आन्दोलन को समर्थन का एलान क्यूँ  नहीं कर रही? आप और आपका अन्तेवासी व् परम शिष्य राहुल उस समय अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ नारा  लगाने रामलीला मैदान पहुँच गए होते - जब अन्ना वहां अनशन पर थे - तो इस देश का कल्याण हो जाता.

जब आप की सरकार और वोह प्रखर, मेधावी अर्थशास्त्री पैर के नाख़ून से लेके शिखा तक खुद भ्रष्टाचार में लिप्त है, आप संघ पर भ्रष्टाचार विरोधी होने का संगीन आरोप लगाते है! यह तो किसी गायक को सुरीला कहेना जैसा इलज़ाम है! आपने कभी सुना है की, अच्छा खेलने वाले खिलाड़ी पर किसी ने अच्छा खेलने का इलज़ाम लगाया हो? यह बात स्वयं आप के वैचारिक स्तर का सब से बड़ा सबूत है. मेरे मन में यह विचार भी उठ रहा है आप की, हर अंदाज़ से बीमार अध्यक्षा अगर अमेरिका से वापस लौट के अन्नाजी के आन्दोलन को समर्थन देती तो मानो यह देश एक बार फिर से सोने की चिड़िया बन जाता और हमें लगता की यहाँ फिर से घी-दूध की नदिया बहेने लगी है. ऐसा कुछ नहीं हुआ. कौन भला अपनी कबर खोदना चाहेगा? आप ने कभी सियामिज़ ट्विन्स के बारे में सुना है? ऐसे जुड़वाँ - जो जन्म से ही एक-दुसरे के अंग के साथ जुड़े होते है. दोनों के पास कभी एक कोमन शरीर होता है, एक सोता है - दूसरा जाग नहीं सकता. जब एक को इन्फेक्शन होता है, दुसरे को अवश्य बुखार होता है. उन को अलग करना मुमकिन नहीं. डॉक्टर्स कहेते है, अगर काट दिया, दोनों मर जायेंगे. फिर वोह आदतन जीते रहेते है. कोंग्रेस और भ्रष्टाचार भी ऐसे ही जुडवा है, वोह अलग नहीं है. दोनों की व्याख्या एक ही है, अर्थ और अस्तित्व एक ही है. एक जिंदा है तो दूसरा भी साँसे ले रहा है. दोनों एक - दुसरे के अस्तित्व का सम्मान करते है. क्यूँ की, इसी में उन का अपना अस्तित्व जुडा है. जुड़े रहेना उन का स्वार्थ है, जुड़े रहेना उन की ज़िन्दगी है. 

यह अनोखी यात्रा है कोंग्रेस की.
और यह पड़ाव भी बहुत अवर्णनीय है!
जहाँ लाज - शर्म सब छुट गया है.
एक तम्बूरा ले के जैसे मीराबाई जोगन बन
गलियों में घुमा करती थी, आज एक भोगन
बन कोंग्रेस पार्टी हाथ में पांचसो-हजार की गड्डी
लिए हुए देश में निर्भीक घूम रही है.
जब आप ऐसा कोई पत्र लिखते है,
कृपया अपनी स्थिति का पहेले
अवलोकन कर लिया कीजिये. 





  
मै एक लेखक - पत्रकार हूँ. पर सबसे पहेले मै तक़दीर का मारा एक भारतीय हूँ. शायद मेरा जन्म बहुत जल्दी हुआ है, या फिर मैं दौसो साल देर से जन्मा हूँ. मैं आप जैसे गंदे लोगो को अपने नेताओ के रूप में देखना अपने जीवन की सबसे बड़ी बदकिस्मती और विवशता समजता हूँ. यह स्थिति मुझे स्वीकार्य नहीं. क्यूँ की यह डेमोक्रसी नहीं है, यह केकिस्तोक्रसी है. जहाँ बहुत सारे नीच और अधम लोग मिल के लोगो के सर पे बैठ अपनी हुकूमत चलाते है. आप इस सूचि में अपने मेडम और प्रखर अर्थशास्त्री के साथ शीर्ष पर बिराजमान है. मेरे जैसे करोडो लोग है - जो आप सब लोगो को अपने दिलोदिमाग से घृणा करते है. मै पत्रकार - लेखक हूँ, चाहू तो अपनी बात बिटविन ध लाइन्स लिख सकता हूँ. पर में कोई शब्द चुराना नहीं चाहता. क्यूँ लिखू बिटविन ध लाइन्स? कुशासन और भ्रष्टाचार का निर्वस्त्र नाच जब खुल्लेआम हो रहा है, में अपनी नाराज़गी खुल के ज़ाहिर क्यूँ न करू? मुझे कहेने दीजिये की, जब आप के गंदे निवेदन सुबह-सुबह टेलिविज़न पर सुनते है, हमारा दिन वही से खराब हो जाता है, जब आप की अधिष्ठात्री देवी की खामोशी रोज सुबह हमारे कानो से टकराती है, हमारे कान फट जाते है. जब हम १२० करोड़ लोगो का नेतृत्व करनेवाले दुनिया के अनूठे इमानदार सरदारजी को देश की समस्याए सुलजाने के लिए प्रतिबध्धता की जगह जादू की छड़ी ढूंढ़ रहे पाते है तो लगता है की, सवासो करोड़ लोग मानो पंगु व् नि:सहाय हो गए. नेतृत्व की और इमानदारी का ऐसा सुखा शायद ही हमारे पांच हजार वर्ष के इतिहास में आया हो. कमबख्ती यह है की, इस सूखे का साक्षी बनना और इनका शिकार बनना हमारी किस्मत में ही लिखा था! 

और आप जैसे लोग इस स्थिति का आनंद उठाना भी जानते है. सही में आप स्थितप्रग्न है. मेरे पास कहेने को बहुत कुछ है किन्तु यहाँ अपनी बात समाप्त कर रहा हूँ. आप से यह निवेदन है की, कृपया अपनी बकवास बंध मत कीजियेगा. यह जो कुछ भी आप बोलते है - उस से हमें और बल मिलता है. लगता है की अन्ना सच में आपका सिरदर्द बने हुए है. यह धारणा और भी पक्की होती चली जाती है. आप बोलते रहिये, क्यूँ की आपकी बकवास न सिर्फ आपकी मानसिकता बल्कि मेडम और उनके राजकुमार के गंदे खयालात भी बयाँ करती है. आप जैसे लोग है तो अन्ना है, अगर आप और मेडम वगैरह नहीं होंगे तो अन्ना की ज़रूरत क्या रह जायेगी. 

आपके नए पत्र की प्रतीक्षा है. 

-किन्नर आचार्य 
Mobile: +919825304041

20 comments:

  1. superb! Post it as a comment on digvijay singh's blog! Or send it on his address! At least it should be telecasted on electronic media so that whole country can knw reality about diggy raja!

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  2. चर्चा से जरुर भृष्टाचार हटेगा. आज नहीं तो कल, अन्ना हजारे ओर कीतने लोगके सहयोग से जन जागृत्ती आयेगी. लोक तंत्रमें जनता ही महान होती है. पुरा जन मानस जब ईस गतीवीधीमें सामील होगा, हमें फायदा होगा....

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  3. Salaam Kinnerbhai ! Darek Deshvasio na man ni vaat kahi che aape.

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  4. ==

    http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10385519.cms

    हिसार उपचुनाव में कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। कांग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी ने मीडिया से बातचीत में हालांकि कहा कि चुनाव नतीजों का अन्ना की अपील से कोई मतलब नहीं है। उनके मुताबिक कांग्रेस की हार अन्ना की अपील की वजह से नहीं हुई है। हालांकि मुखर्जी यह नहीं बता पाए कि हार क्यों हुई है। उन्होंने कहा, उनकी पार्टी इस बात पर विचार करेगी कि कांग्रेस की हार की क्या वजहें रहीं।

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  5. Aap ke is Lekh mein yadi shree sharad rao ji pawar saheb (food inflation and mismanagment of food economy) aur shree praful patel (besharm ki tarah AIR INDIA ko BECH dala & hajaro crores ke khade dal diya) ka jikre hota to aur bhi Lekh nikhar jata.......

    Yadi Diggy raja ka kalmadi aur raja ka bachao ke yeh log nirdosh hai... (CBI arrest ke baad) logon ko yaad dilyao to kaisa rehega ......

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  6. vaah kinner bhai dhardar, jordar.

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  7. Bilkul theek likha aap ne,aur ye hum sab ki man ki baat hai.Ise Diggy tak jaroor pahunchana chahiye,ha magar vunko koi pharak nahi padnewala kyonki wo des bhakti,imaandari aur sharam jaise cheeson ko kab ka chod diya

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  8. This is a story of Toofan and Diya.















    This is a story of Toofan and Diya. On one side we have Toofan in the form of Soniya and her defamed team and on the other Anna and his truthful team.But ultimately this Diya will win because it has its fuel as TRUTH.

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  9. like the way u have presented ur aggression. This Diggi Raja has lost his sense and he is making himself a joker. I amuse, if anybody within party considering him seriously.
    - Dhaivat

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  10. A very balanced letter with accurate facts.Bravo Kinnar Acharya, keep i up and now it is our duty to ensure that this letter in circulated to Indians in every languge

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  11. दिग्गी राजा दूसरों के पाप गिनने से खुद के पाप काम नहीं होते.. जबरन विरोध ठीक नहीं हे बहुत वर्षों के बाद नई सुबह की किरण निकली जो देश में नया प्रकाश फेलाएगी पचस वासों से जनता को चूस रहे हो ओर बात करते हो काग्रेस का कोई भी नेता साफ नहीं हे साफ होता तो आज किसी लोकपाल की जरूरत नहीं थी सो,दो ,सो करोड़ पचाने का दम नहीं एक _एक लाख करोड़ खा गए अपच हो गया उलटी दस्त कर रहे हें तिहाड़ में बैठकर, भला हो न्यायपालिक का जो उसने इनका हजम ख़राब कर दिया नहीं तो पता हे नाहे चल ता जनता को

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  12. congress should remember ki whatever daags the congress ,other parties and some media trying to put on team anna ,they can not take the credit back from team anna of awaking the people of india against corruption.

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  13. Oh!!! Now I understand why they are trying to censor internet? Very well written.... Koi jawab aaya kya Diggi "Raja" se?

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  14. Please publish in english
    Thanks,
    seeker of light

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  15. DIGVIJAY JI,

    AAP KE ANUSAR ANNA JI, RAMDEV JI, SRI SRI RAVISAHANKAR JI RSS KE LOG HAIN!!!!!!!!!!, SHAYAD IS LIYE KE UNHONEY CONGRESS KE BHRASTACHAR KE VIRRUDH AWAJ UTHAYI. LEKIN AB TO CONGRESS KE KHILAF SHAHI IMMAM NE BHI AWAZ UTHAYI HAIN. TO DIGGI JI KYA SHAHI IMMAM BHI RSS KE AADMI HAIN.

    AUR SHEELA JI, GUJARAT CONGRESS NE NARENDRA MODI KI TAARIF KI HAI, TAB TO PHIR WOH BHI RSS KE HONE CHAHIYE.

    THANKS.

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  16. can we share this on social media ?? its superb

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દેશી ગૌવંશના અસલી-પ્રતિબધ્ધ રખેવાળો

ગીર ગાયના દૂધમાંથી પાંચ કિલોની બર્થ ડે કેક ... દેશી ગાયનાં ઘીમાંથી મોહનથાળ અને ગુલાબ જામ્બુ ... ગોબરમાંથી એન્ટી રેડિએશન ટેબ્લેટ ... કોસ્મે...